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17 Benefits of Medical Insurance
23 फरवरी, 2022

हेल्थ इंश्योरेंस के लाभ

हेल्थ इंश्योरेंस एक अत्यंत आवश्यक चीज़ है, जिसे मौजूदा समय में नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता. इससे मिलने वाले विभिन्न लाभों को ध्यान में रखते हुए यह बहुत मुश्किल है कि आप फाइनेंशियल रूप से सुरक्षित होने के इस मौके को छोड़ दें. इससे पहले कि आप जानें कि यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है, आपको पता होना चाहिए कि: हेल्थ इंश्योरेंस क्या है ? हेल्थ इंश्योरेंस इंश्योरेंस कंपनी और पॉलिसीधारक के बीच एक ऐसा एग्रीमेंट है, जो मेडिकल खर्चों की भरपाई करता है. ग्लोबल इंश्योरेंस सेक्टर की तुलना में भारत में हेल्थ इंश्योरेंस की स्थिति अलग है. अक्टूबर 2021 में जारी नीति आयोग की 'हेल्थ इंश्योरेंस फॉर इंडियाज मिसिंग मिडल' रिपोर्ट के अनुसार, कुल भारतीय जनसंख्या के 30% से अधिक या 40 करोड़ व्यक्ति ऐसे हैं, जिनके पास स्वास्थ्य से संबधित कोई फाइनेंशियल सुरक्षा नहीं हैं[1]. मौजूदा दौर में महामारी से जूझती हुई इस दुनिया में स्वास्थ्य के बढ़ते महत्व के कारण, इंश्योरेंस की विकास दर में बढ़ोत्तरी हुई है. Economic Times ने भी यह माना है कि महामारी की दूसरी लहर के बाद हेल्थ इंश्योरेंस की मांग में कम से कम 30% की बढ़ोत्तरी हुई है[2]. इससे भी ज़्यादा हैरानी भरी बात यह है कि अधिक से अधिक युवा प्रोफेशनल्स हेल्थ इंश्योरेंस के लाभों को समझ रहे हैं.

हेल्थ इंश्योरेंस के क्या लाभ हैं?

इस आर्टिकल में हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के उन लाभों की पूरी लिस्ट के बारे में बताया गया है, जिनके आधार पर आप भविष्य में खरीदी जाने वाले अपनी पॉलिसी को निर्धारित कर सकते हैं.  
  1. व्यापक मेडिकल कवरेज

हेल्थ इंश्योरेंस प्लान को कम्प्रीहेंसिव मेडिकल इंश्योरेंस कवर प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे आपको इलाज में होने वाले बड़े खर्च की लागत को मैनेज करने के बारे में चिंता करने की अब कोई आवश्यकता नहीं है. फाइनेंस की चिंता किए बिना अचानक होने वाले हॉस्पिटलाइज़ेशन या प्लान किए गए इलाज को मैनेज करने के लिए यह एक अच्छा समाधान है.  
  1. इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइज़ेशन: इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइज़ेशन का मतलब उस इलाज से है, जिसमें रोगी को कम से कम 24 घंटों के लिए मेडिकल फैसिलिटी में भर्ती किया जाता है. सभी इंश्योरेंस पॉलिसी को इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइज़ेशन को कवर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है.
  2. प्री- और पोस्ट-हॉस्पिटलाइज़ेशन कवर: हॉस्पिटलाइज़ेशन में ट्रीटमेंट पर आने वाली लागत के साथ मेडिकल इंश्योरेंस के लाभ में प्री और पोस्ट-ट्रीटमेंट के खर्चे शामिल हैं, साथ ही मेडिकल प्रोफेशनल द्वारा निर्धारित टेस्ट के लिए डायग्नोसिस शुल्क और खर्चे भी शामिल हैं. दूसरी ओर पोस्ट-हॉस्पिटलाइज़ेशन कवर इलाज के बाद होने वाले आवश्यक खर्चों के लिए फाइनेंशियल सहायता प्रदान करता है. कभी-कभी, ऐसा हो सकता है कि आवश्यक दवाओं की लागत अधिक हो, ऐसी स्थितियों में पोस्ट-ट्रीटमेंट कवर मदद करता है. आमतौर पर, हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी प्री-ट्रीटमेंट खर्चों के लिए 30-दिन का कवर प्रदान करती है, जबकि पोस्ट-ट्रीटमेंट के खर्चों के लिए 60-दिन का कवर प्रदान करती है.
  3. डे-केयर खर्च: डे-केयर प्रोसीज़र ऐसी सर्जरी हैं, जिनके लिए पहले हॉस्पिटलाइज़ेशन की आवश्यकता पड़ती थी, लेकिन मौजूदा समय में इन्हें कुछ घंटों के भीतर पूरा किया जा सकता है. असरदार दवाओं और बेहतर मेडिकल प्रोसीज़र के साथ-साथ मेडिकल टेक्नोलॉजी में हुए सुधार ने इसे मुमकिन बना दिया है. इसके अलावा, इसे शॉर्ट-टर्म हॉस्पिटलाइज़ेशन भी कहा जाता है. आमतौर पर, डे-केयर प्रोसीज़र के लिए आवश्यक समय 2 घंटे से अधिक लेकिन 24 घंटे से कम होता है. हेल्थ इंश्योरेंस में डे-केयर खर्चों के लिए कवरेज में ऐसे मामूली इलाजों को इंश्योर किया जाता है, जिनकी लागत महंगी होती है.
  4. गंभीर बीमारियों के लिए कवरेज: ऐसी बीमारियां, जो गंभीर होती हैं और लंबे समय तक चलने वाली होती हैं, जैसे कि दिल की बीमारी, किडनी फेल होना, अलग-अलग तरह के कैंसर, वे क्रिटिकल इलनेस कवर में शामिल होती हैं. जब मेडिकल खर्च की भरपाई की बात आती है, तो क्रिटिकल इलनेस प्लान अलग तरीके से काम करता है. इसमें, निर्धारित बीमारी के डायग्नोसिस होने पर इंश्योरेंस कंपनी द्वारा पूरे सम एश्योर्ड का एकमुश्त भुगतान किया जाता है. इस तरह के एकमुश्त भुगतान से इलाज के लिए फाइनेंशियल सहायता के साथ-साथ मेडिकल सहायता से जुड़े अन्य खर्चों की लागतें भी मिलती हैं. यह क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस  अंग दान को भी कवर करता है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं.
  5. रूम रेंट और आईसीयू शुल्क: हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के कम्प्रीहेंसिव कवरेज में रूम रेंट और आईसीयू शुल्क का कवर भी शामिल होता है. रूम रेंट वह खर्च है, जो इलाज के दौरान मेडिकल फैसिलिटी में इंश्योर्ड व्यक्ति के रहने पर होता है. बीमारी के आधार पर, बीमार व्यक्ति को रेगुलर वार्ड या आईसीयू या आईसीसीयू में भी भर्ती किया जा सकता है. आमतौर पर, इंश्योरेंस प्लान के तहत कवर किए जाने वाले रूम रेंट की राशि की एक सीमा होती है. इस राशि से अधिक रूम रेंट होने पर, रूम रेंट के खर्च का भुगतान पॉलिसीधारक को करना होता है.
*मानक नियम व शर्तें लागू  
  1. नेटवर्क हॉस्पिटल्स में कैशलेस ट्रीटमेंट

हेल्थ इंश्योरेंस प्लान इसलिए खरीदे जाते हैं कि अचानक आने वाली मेडिकल एमरजेंसी के समय फाइनेंशियल सुरक्षा का लाभ उठाया जा सके. इस समय मेडिकल बिलों का भुगतान करना और उन्हें रिइम्बर्स कराना एक परेशानी भरा काम हो सकता है. इसलिए उस पॉलिसी का विकल्प चुनें, जो कैशलेस क्लेम की सुविधा देती हो. एक कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस  प्लान में, इलाज की लागत का भुगतान इंश्योरेंस कंपनी द्वारा सीधे हॉस्पिटल को किया जाता है, जिससे आपको इलाज के दौरान कैश की कोई महत्वपूर्ण आवश्यकता नहीं होती है.
  1. घर पर इलाज के लिए डोमिसिलियरी कवर

हेल्थ इंश्योरेंस के लाभों में डोमिसिलियरी कवर शामिल हैं, जिसमें पॉलिसीधारक घर पर इलाज कराने की सुविधा का लाभ उठा सकता है. इसकी आवश्यकता तब हो सकती है, जब मेडिकल सुविधाओं की कमी हो या ऐसी गंभीर बीमारी हो, जिसकी वजह से बीमार व्यक्ति चलने-फिरने में असमर्थ हो. वृद्ध व्यक्ति हेल्थ इंश्योरेंस की इस सुविधा से लाभ उठा सकते हैं. हेल्थ इंश्योरेंस की इस सुविधा का सबसे मुख्य लाभ यह है कि यह बीमार व्यक्तियों को तब इलाज उपलब्ध कराता है, जब उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती होने में कोई समस्या होती है या चलने-फिरने से जुड़ी समस्याएं होती हैं.*
  1. बीमार व्यक्ति के ट्रांसपोर्टेशन के लिए एम्बुलेंस शुल्क

हेल्थ इंश्योरेंस प्लान अतिरिक्त लाभ के रूप में वे एम्बुलेंस खर्च भी प्रदान करते हैं, जो पॉलिसी के दायरे में आते हैं. एम्बुलेंस का उपयोग करके बीमार व्यक्ति के ट्रांसपोर्टेशन में लगने वाले किसी भी शुल्क को हेल्थ इंश्योरेंस प्लान में कवर किया जाता है. ट्रांसपोर्टेशन में आने वाला खर्च अधिक होता है, खासकर मेट्रो शहरों में, इसलिए ऐसे खर्चों को कवर करने वाली हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का होना सबसे बेहतर है.*
  1. पहले से मौजूद बीमारियों के लिए कवरेज

हेल्थ इंश्योरेंस के लाभों में पहले से मौजूद बीमारियों के लिए कवरेज भी शामिल है. पॉलिसी खरीदते समय किसी व्यक्ति को पहले से मौजूद कुछ बीमारियां हो सकती हैं, जैसे दिल की बीमारी, कैंसर और अस्थमा जैसी पुरानी बीमारियां. ऐसा खासकर अधिक उम्र में हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने वालों के मामले में होता है. ऐसी बीमारियां, जो पॉलिसी खरीदने वाले व्यक्ति को पॉलिसी खरीदने के पहले से ही हैं, उन्हें पहले से मौजूद बीमारियां कहा जाता है. जब आप हेल्थ इंश्योरेंस प्लान खरीदते हैं, तो इसके कवरेज में पहले से मौजूद बीमारियों के साथ-साथ निर्दिष्ट बीमारियों का भविष्य में होने वाला इलाज भी शामिल होता है. इसलिए, आपको इन इलाजों के लिए अपनी जेब से भुगतान करने की कोई ज़रूरत नहीं है. ध्यान देने वाली एक बात यह है कि इंश्योरेंस कंपनी ऐसे मामलों में आमतौर पर एक प्रतीक्षा अवधि लगाती है, जिसके पहले ऐसी बीमारियां आपकी पॉलिसी में शामिल की जाती हैं और आपको खरीदने से पहले इसे अवश्य चेक करना चाहिए.*
  1. रिन्यूअल पर संचयी बोनस

अगर पॉलिसीधारक द्वारा प्रत्येक पॉलिसी अवधि में कोई भी क्लेम नहीं किया गया है. तो ऐसी स्थिति में, कोई भी क्लेम नहीं करने का लाभ आपको आपकी इंश्योरेंस रिन्यूअल के समय पॉलिसी के सम अश्योर्ड में बढ़ोत्तरी के रूप में मिलता है. सम अश्योर्ड में हुई इस बढ़ोत्तरी को संचयी बोनस के रूप में जाना जाता है और यह सम अश्योर्ड के 10% से लेकर 100% तक के बीच होता है और हेल्थ इंश्योरेंस के इस लाभ बारे में बहुत कम लोग जानते हैं.*
  1. लाइफटाइम रिन्यूअबिलिटी

मेडिकल इंश्योरेंस में लाइफटाइम रिन्यूएबिलिटी लाभ के तहत पॉलिसीधारक को बिना किसी आयु प्रतिबंध के हेल्थ इंश्योरेंस प्लान को रिन्यूअल करने की सुविधा मिलती है. यह तब और भी अधिक उपयोगी होता है, जब आपके पास फैमिली फ्लोटर प्लान हो और पॉलिसी के तहत कवर किए जाने वाले सदस्यों में सबसे अधिक बड़े सदस्य की आयु पॉलिसी के नियमों के तहत दी गई आयु की अधिकतम सीमा के बराबर हो गई हो. आमतौर पर निश्चित अवधि के बाद कवरेज समाप्त हो जाता है, लेकिन हेल्थ इंश्योरेंस के लाइफटाइम रिन्यूएबिलिटी लाभ के साथ आप जीवन भर लगातार रिन्यूअल का लाभ ले सकते हैं. इसके अलावा सीनियर सिटीज़न के लिए, लाइफटाइम रिन्यूअबिलिटी अपने इंश्योरेंस कवर के निरंतर रिन्यूअल के साथ मेडिकल एमरज़ेंसी के किसी भी फाइनेंशियल प्रेशर को कम करती है.*
  1. कॉन्वॉलसेंस बेनिफिट

कुछ बीमारियां ऐसी भी होती हैं, जिनमें हॉस्पिटलाइज़ेशन की अवधि से अधिक समय उस बीमारी से रिकवर होने में लगता है. ऐसा बीमारी के गंभीर होने या इलाज की गंभीरता की वजह से हो सकता है. इसी समय पर कॉन्वॉलसेंस बेनिफिट काम में आता है. ऐसी स्थिति में, इंश्योरर रिकवरी लागत के लिए एकमुश्त राशि का भुगतान करता है और यह अवधि सात या दस दिनों के बीच हो सकती है. यह रिकवरी की अवधि के दौरान इनकम के नुकसान की भी भरपाई कर सकता है.*
  1. वैकल्पिक ट्रीटमेंट (आयुष) पाने का विकल्प

हेल्थ इंश्योरेंस के लाभों में वैकल्पिक इलाजों के लिए कवरेज भी शामिल हैं, जिसमें आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी से होने वाले प्रोसीज़र शामिल हैं. इस तरह के इलाज मुख्यधारा के इलाज के तरीकों के अन्दर नहीं आते हैं. हेल्थ इंश्योरेंस प्लान पॉलिसीधारक को इलाज का विकल्प प्रदान करने के लिए अतिरिक्त कवरेज प्रदान करते हैं.
  1. डेली हॉस्पिटल कैश अलाउंस

अगर आप हॉस्पिटल में भर्ती होते हैं, तो उस अवधि के दौरान आप काम नहीं कर पाते, जिससे आपकी उन दिनों कोई आमदनी नहीं होती है. ऐसी परिस्थिति में, आपको हॉस्पिटल के बढ़ते बिलों के साथ कैश की कमी का भी सामना करना पड़ सकता है. डेली हॉस्पिटल कैश अलाउंस सुविधा का उपयोग करके आप ऐसी स्थिति से बच सकते हैं. इंश्योरेंस कंपनी हॉस्पिटलाइज़ेशन के प्रत्येक दिन के लिए एक निर्धारित राशि प्रदान करती है, जो आमदनी के नुकसान की भरपाई करती है.*
  1. मेडिकल चेक-अप की सुविधा

बीमारियां कभी भी पहले से बताकर नहीं आती, इसलिए हेल्थ इंश्योरेंस प्लान आपको मेडिकल चेक-अप की सुविधा देकर लाभ उठाने का मौका देता है. आमतौर पर यह सुविधा वार्षिक आधार पर दी जाती है, जिसका इस्तेमाल करके आप अपने स्वास्थ्य की जांच करा सकते हैं और बीमारी का पता लगने पर शुरुआती दौर में ही इलाज करा सकते हैं. आपके हेल्थ इंश्योरेंस प्लान के आधार पर, मेडिकल चेक-अप की लागत इंश्योरेंस कंपनी द्वारा वहन की जाती है. वैकल्पिक रूप से, कुछ मामलों में, इसकी लागत इंश्योरर द्वारा रिइम्बर्स भी की जाती है.*
  1. बेरियाट्रिक ट्रीटमेंट के लिए कवरेज

सभी इंश्योरेंस कंपनियां बेरियाट्रिक ट्रीटमेंट के लिए कवर नहीं प्रदान करती हैं, केवल कुछ चुनिंदा (जिसमें बजाज आलियांज़ जनरल इंश्योरेंस कंपनी शामिल है) यह कवर प्रदान करती है. बेरियाट्रिक सर्जरी मोटापे के ट्रीटमेंट के लिए एक मेडिकल प्रोसीज़र है, जब स्टैंडर्ड वेट-लॉस उपाय जैसे आहार, नियमित और कठोर एक्सरसाइज़ के प्रयास किए गए हैं, लेकिन इससे मनचाहा प्रभाव नहीं पड़ता है, तो यह कवर करता है.*
  1. सम इंश्योर्ड रेस्टोरेशन के लाभ

रिस्टोरेशन लाभ हेल्थ इंश्योरेंस प्लान की एक ऐसी विशेषता है, जो इस्तेमाल की जा चुकी क्लेम राशि को वापस सम एश्योर्ड में जोड़ देता है. इसका लाभ आमतौर पर फैमिली हेल्थ इंश्योरेंस प्लान के साथ लिया जाता है. यह पॉलिसी के एक ही सदस्य या अलग-अलग सदस्यों पर बार-बार होने वाले मेडिकल खर्च की भरपाई करने में सहायता करता है. इलाज की बढ़ती कीमतों को ध्यान में रखते हुए यह कहा जा सकता है कि इलाज के लिए पूरे सम एश्योर्ड का इस्तेमाल करने के बाद आगे के इलाज के लिए आपको अपनी जेब से भुगतान करना पड़ेगा. लेकिन इस सुविधा के साथ, आपके सम एश्योर्ड में इस्तेमाल की गई राशि वापस जुड़ जाती है, जिससे आपका सम एश्योर्ड, ऑरिजिनल सम एश्योर्ड जितना ही बना रहता है.* पॉलिसी कवरेज समाप्त होने के आधार पर रीस्टोरेशन लाभ को दो प्रकारों में बांटा जा सकता है- सम एश्योर्ड का पूरी तरह खर्च होना या सम एश्योर्ड का आंशिक रूप से खर्च होना. पूरी तरह से सम एश्योर्ड समाप्त होने का मतलब है कि पूरी इंश्योरेंस राशि खर्च हो जानी चाहिए, तभी रीस्टोरेशन लाभ मिल सकता है. इसके उलट, सम एश्योर्ड के आंशिक रूप से खर्च होने पर, रीस्टोर करने के लिए सम एश्योर्ड के खर्च हो चुके आंशिक हिस्से का ही उपयोग किया जाता है. पॉलिसी खरीदने से पहले यह जानना बेहद आवश्यक है कि इंश्योरेंस कंपनी किस तरह के रिस्टोरेशन लाभ प्रदान करती है.
  1. मैटरनिटी कवरेज और नवजात शिशु के लिए कवर

हेल्थ इंश्योरेंस के लाभों में प्रेग्नेंसी और बच्चे के जन्म पर होने वाले खर्चों के लिए कवरेज शामिल होते हैं. मां बनना एक नया और शानदार अनुभव होता है, लेकिन इसमें मेडिकल जटिलताएं भी सामने आ सकती हैं. ऐसे समय में, हेल्थ इंश्योरेंस प्लान आपको फाइनेंशियल सुरक्षा कवच प्रदान कर सकता है, जिससे आप बेफिक्र होकर इलाज पर ध्यान लगा सकते हैं और आपको चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं होती है. इसके अलावा, हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में मैटरनिटी कवर नवजात शिशुओं को 90 दिनों तक सुरक्षा भी प्रदान करता है. याद रखें - मैटरनिटी कवर में प्रेग्नेंसी को पहले से मौजूद बीमारी के अन्तर्गत रखा जाता है, इसलिए समय से पहले ही मैटरनिटी कवर खरीद लेना चाहिए.*
  1. ऐड-ऑन राइडर्स

मेडिकल इंश्योरेंस कवर के लाभों में ऐड-ऑन राइडर का उपयोग करके अपने इंश्योरेंस कवर को अपने हिसाब से कस्टमाइज़ करने की सुविधा भी शामिल है. ये राइडर वैकल्पिक विशेषताएं होती हैं, जिनका उपयोग आप अपनी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के दायरे को बढ़ाने के लिए कर सकते हैं. इस तरह, अतिरिक्त कवरेज सुनिश्चित करके आप अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी को अपने हिसाब से कस्टमाइज़ कर सकते हैं.*
  1. कोविड-19 के लिए कवरेज

पॉलिसी डॉक्यूमेंट में दर्ज ट्रीटमेंट के लिए क्षतिपूर्ति के अलावा, हेल्थ इंश्योरेंस प्लान कोविड-19 के लिए कवरेज प्रदान करते हैं, जो मार्च 2020 में Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) के सर्कुलर के अनुसार निर्धारित किया गया है, जिसमें सभी मौजूदा इंश्योरेंस प्लान में कोविड-19 के लिए कवरेज को शामिल करने और मामलों को तेज़ी से हैंडल करने का निर्देश दिया गया है[3]. अगर आप कोविड वायरस के लिए कवरेज चाहते हैं, तो हेल्थ इंश्योरेंस प्लान आपको आवश्यक लाभ उपलब्ध कराता है.*
  1. वेलनेस लाभ

वेलनेस लाभ की अवधारणा इस कहावत के आधार पर काम करती है कि रोकथाम इलाज से बेहतर है.’ वेलनेस लाभ हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों द्वारा प्रदान की जाने वाली फाइनेंशियल सहायता के अतिरिक्त लाभ होते हैं. ये वेलनेस लाभ रिन्यूअल प्रीमियम में छूट के रूप में, कुछ खास ऑर्गेनाइज़ेशन के मेंबरशिप लाभ, बूस्टर और सप्लीमेंट के लिए वाउचर, मुफ्त डायग्नोस्टिक चेक और हेल्थ चेक-अप, रिडीम किए जा सकने वाले फार्मास्यूटिकल वाउचर आदि के रूप में हो सकते हैं. अगर आप वेलनेस लाभ वाला प्लान चुनते हैं, तो आपका फायदा ही फायदा है, क्योंकि यह आपको बीमारियों से एक कदम आगे रहने में मदद करता है.*
  1. सेक्शन 80डी के तहत टैक्स लाभ

हेल्थ इंश्योरेंस प्लान आपको केवल फाइनेंशियल सुरक्षा ही नहीं देते, बल्कि टैक्स लाभ भी प्रदान करते हैं. ये टैक्स लाभ डिडक्शन के रूप में उपलब्ध होते हैं. भुगतान किया गया कोई भी प्रीमियम इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80डी के तहत डिडक्शन के लिए पात्र है. डिडक्शन आयु वर्ग के आधार पर अलग-अलग हो सकता है, जिसकी अधिकतम सीमा रु. 50,000 है. नीचे दी गई टेबल में उस डिडक्शन के बारे में बताया गया है, जिसका लाभ उठाया जा सकता है –  
परिस्थिति आपकी इनकम के रिटर्न पर अधिकतम डिडक्शन सेक्शन 80डी के तहत कुल डिडक्शन
पॉलिसीधारक, उनके स्पाउस और उनके आश्रित बच्चों के लिए माता-पिता के लिए, चाहे वे आश्रित हों या नहीं हों
कोई भी सदस्य सीनियर सिटीज़न नहीं है रु. 25,000 तक रु. 25,000 तक ₹ 50,000
पॉलिसीधारक और परिवार के अन्य सदस्यों की आयु 60 वर्ष से कम हैं और माता-पिता की आयु 60 वर्ष से अधिक है रु. 25,000 तक रु. 50,000 तक ₹ 75,000
या तो पॉलिसीधारक ने या परिवार के किसी अन्य सदस्य ने 60 वर्ष की आयु पार कर ली है और माता-पिता की आयु भी 60 वर्ष से अधिक है रु. 50,000 तक रु. 50,000 तक ₹ 1,00,000
  भुगतान किए गए किसी भी प्रीमियम पर डिडक्शन के अलावा, मेडिकल इंश्योरेंस लाभों में रु. 5,000 तक के प्रिवेंटिव हेल्थ चेक-अप के लिए डिडक्शन शामिल है, जो उपरोक्त राशि के तहत सब-लिमिट है. टैक्स लाभ, टैक्स कानूनों में बदलाव के अधीन हैं. टैक्स बचत के लिए और अधिक पढ़ें और जानें क्या है सेक्शन 80डी मेडिकल खर्च . *मानक नियम व शर्तें लागू  

आपको हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की आवश्यकता क्यों है

  • अपनी मेहनत से कमाई गई बचत की सुरक्षा:
हेल्थ इंश्योरेंस आपकी मेहनत की कमाई के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है. ज़रा सोचें कि आप अपनी बचत को अलग-अलग जगह इन्वेस्टमेंट के विकल्पों में इन्वेस्ट करते हैं और अचानक आपके परिवार में किसी मेडिकल एमरजेंसी के समय आपको उन सभी इन्वेस्टमेंट को निकालने की आवश्यकता आ पड़ती है. ऐसे में हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी आपको सुरक्षा प्रदान करती है, जिससे आपको इलाज के खर्चों का भुगतान करने के लिए अपने इन्वेस्टमेंट को खत्म करने की आवश्यकता नहीं होती है.
  • कॉर्पोरेट इंश्योरेंस कवर के साथ अतिरिक्त फाइनेंशियल कवरेज:
हेल्थ इंश्योरेंस मौजूदा समय में एक आवश्यक सुरक्षा कवच है और बहुत से कॉर्पोरेट संस्थान ऑफर किए जाने वाले अतिरिक्त लाभ के रूप में हेल्थ इंश्योरेंस भी प्रदान करते हैं. यह अतिरिक्त लाभ कर्मचारियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को सुनिश्चित करता है. लेकिन इन प्लान की एक सीमा यह है कि वे केवल तब तक ही मान्य होते हैं, जब तक आप नियोक्ता से जुड़े होते हैं. इसका मतलब यह है कि अगर आपका रोज़गार समाप्त हो जाता है, तो आपका हेल्थ इंश्योरेंस कवर भी समाप्त हो जाता है. इस प्रकार पर्सनल मेडिकल इंश्योरेंस आपके रोज़गार के खत्म होने के बाद भी आपको सुरक्षा प्रदान करता है.
  • मेडिकल सुविधाओं की बढ़ती कीमतों से मुकाबले के लिए आवश्यक
मेडिकल सुविधाएं लगातार महंगी हो रही हैं, जिससे इलाज की लागत में बढ़ोत्तरी हो रही है. बढ़ती महंगाई के साथ-साथ नए और एडवांस्ड इलाज भी इसके कुछ कारण हैं. इलाज की लागत में तेज़ी से हो रही बढ़ोत्तरी के कारण मेडिकल एमरज़ेंसी के समय के लिए बचत करना बहुत मुश्किल भरा काम हो सकता है. यह स्थिति इतनी गंभीर है कि मेडिकल खर्चों की वजह से होने वाले कर्ज़ के कारण लगभग 7% व्यक्ति गरीबी रेखा से नीचे चले गए हैं[4]. अगर आपके पास हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी है, तो आप ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण स्थितियों से बच सकते हैं. इलाज में आने वाली लागत को मैनेज करने के लिए हेल्थ कवर आपको फाइनेंशियल सहायता प्रदान करता है.  

हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते समय आपको क्या देखना चाहिए?

हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते समय ध्यान रखने लायक कुछ बातें यहां पर दी गई हैं:
  • नेटवर्क हॉस्पिटल्स का कवरेज
कैशलेस सुविधा का लाभ उठाने के लिए, आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आप नेटवर्क हॉस्पिटल्स में से किसी एक हॉस्पिटल में इलाज कराएं. ये नेटवर्क हॉस्पिटल इंश्योरेंस कंपनी से संबद्ध हॉस्पिटल से जुड़ी मेडिकल सुविधाएं होती हैं. यह चेक करना बेहद आवश्यक है कि आपकी हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के पास आपके आस-पास के इलाके और पूरे देश में नेटवर्क हॉस्पिटल्स का विस्तृत कवरेज है या नहीं. यह आपको घर पर और घरेलू यात्रा के दौरान कोई एमरज़ेंसी होने पर भारी-भरकम खर्चों से बचाता है और बेहतरीन इलाज की सुविधा का लाभ उठाने में सक्षम बनाता है.
  • मेडिकल आवश्यकताओं के आधार पर उपयुक्त कवर चुनना
इसके अलावा, लाभार्थी के रूप में सही लाभ के लिए सही प्रकार का हेल्थ इंश्योरेंस कवर खरीदना आवश्यक है. उदाहरण के तौर पर, अगर आपको कॉर्पोरेट इंश्योरेंस प्लान के साथ कवर किया जाता है, तो आपको एक ऐसा फैमिली फ्लोटर प्लान लेना चाहिए, जिसमें परिवार के विभिन्न सदस्य भी शामिल हैं. इस तरह, रोज़गार में बदलाव होने पर आपको बीमारी के कारण पैदा होने वाले फाइनेंशियल जोखिमों का सामना नहीं करना पड़ता है. इसके अलावा, अगर आप अधिक उम्र के व्यक्ति हैं और कवर की तलाश कर रहे हैं, तो सीनियर सिटीज़न के लिए हेल्थ इंश्योरेंस एक उपयुक्त इंश्योरेंस कवर हो सकता है, जो आवश्यक प्रवेश की अधिक आयु के साथ और ट्रीटमेंट प्रदान करता है, जो वृद्धावस्था में ज़रूरी है. अगर उपरोक्त इंश्योरेंस प्लान में से कोई भी उपयुक्त नहीं है, तो आप इंडिविजुअल कवर व्यक्तिगत कवर खरीद सकते हैं, जो एक लाभार्थी के रूप में आपको सुरक्षा प्रदान करता है.
  • पॉलिसी में शामिल नहीं
हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी विभिन्न प्रकार की बीमारियों और मेडिकल एमरज़ेंसी के लिए कवरेज प्रदान करती है, लेकिन कुछ बीमारियां ऐसी भी हो सकती हैं, जिन्हें आपके द्वारा चुने गए प्लान के तहत कवर नहीं किया जाता है. इसलिए, पॉलिसी खरीदने से पहले आपको पॉलिसी की शब्दावली पढ़ने और एक्सक्लूज़न (पॉलिसी में शामिल नहीं बातें) से जुड़ी जानकारी लेने का सुझाव दिया जाता है.  

ऑनलाइन हेल्थ इंश्योरेंस कवर कैसे खरीदें?

अब जब आप हेल्थ इंश्योरेंस प्लान के लाभों की कम्प्रीहेंसिव लिस्ट के बारे में जान चुके हैं, तो अब आपके लिए यह समझना आवश्यक है कि एक हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को कैसे खरीदा जाता है. ऑनलाइन हेल्थ इंश्योरेंस खरीदना एक सीधा और आसान प्रोसेस है. चरण 1: अपनी पसंदीदा इंश्योरेंस कंपनी की वेबसाइट पर जाएं और हेल्थ इंश्योरेंस सेक्शन खोजें. चरण 2: आपको अपनी आवश्यक पर्सनल जानकारी जैसे आयु, लिंग, मोबाइल नंबर आदि दर्ज करनी होगी. चरण 3: इसके बाद, विभिन्न प्रकार के हेल्थ इंश्योरेंस प्लान में से अपने लिए एक उपयुक्त कवर चुनें चरण 4: पॉलिसी के कवरेज को बढ़ाने के लिए इसमें ऐड-ऑन राइडर भी जोड़ें. चरण 5: अब जब आप अपनी पॉलिसी का प्रकार, इसकी विभिन्न विशेषताएं और अतिरिक्त वैकल्पिक राइडर तय कर चुके हैं, तो आप इंश्योरेंस कवर का लाभ उठाने के लिए भुगतान कर सकते हैं. इस चरण से पहले, अपने लिए सबसे अच्छा पॉलिसी का पता लगाने के लिए सभी पॉलिसी की तुलना करना न भूलें.  

हेल्थ इंश्योरेंस प्लान के बारे में कुछ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  1. किफायती कवर का लाभ कैसे उठाया जा सकता है?
चुनने के लिए बहुत सारी इंश्योरेंस पॉलिसी मौजूद हैं. पॉलिसी खरीदने का फैसला लेने के लिए कीमत एक महत्वपूर्ण बात है और आप कम आयु में हेल्थ इंश्योरेंस प्लान में इन्वेस्ट करके अधिक बचत कर सकते हैं. इसके अलावा, आप डिडक्टिबल, को-पे और इसी तरह की अन्य पॉलिसी की शर्तों का उपयोग करके अपने इंश्योरेंस के प्रीमियम को कम करने का विकल्प चुन सकते हैं, जिनके लिए आपको क्लेम के समय योगदान देने की आवश्यकता पड़ती है. इसके अलावा, हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम कैलकुलेटर का इस्तेमाल करने से, आपको न केवल कीमत के आधार पर, बल्कि पॉलिसी की महत्वपूर्ण विशेषताओं के आधार पर पॉलिसी की तुलना करने में मदद मिलती है.
  1. क्या मेरी पॉलिसी पूरे देश में मान्य होगी?
यह हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के बारे में आमतौर पर सबसे अधिक पूछे जाने वाले प्रश्नों में से एक है. आमतौर पर, हेल्थ इंश्योरेंस प्लान पूरे भारत में मान्य होते हैं. देश के किसी भी हिस्से में मेडिकल एमरज़ेंसी हो सकती है, ऐसे में यह आवश्यक है कि आप पॉलिसी की भौगोलिक सीमाओं के बारे में जानें.
  1. क्या कोई व्यक्ति एक से अधिक हेल्थ कवर ले सकता है?
हां, आप कितने भी इंश्योरेंस प्लान खरीद सकते हैं, इसकी कोई सीमा नहीं है. बल्कि एक से अधिक हेल्थ कवर खरीदने का सुझाव दिया जाता है, जिनमें एक पॉलिसी ऐसा सामान्य हेल्थ इंश्योरेंस प्लान हो, जो विभिन्न बीमारियों को कवर करता है और दूसरा हेल्थ इंश्योरेंस गंभीर बीमारी या पहले से मौजूद बीमारियों को कवर करने के लिए हो.
  1. क्या हेल्थ इंश्योरेंस प्लान के तहत क्लेम करने के लिए कोई प्रतीक्षा अवधि होती है?
हां, सभी इंश्योरेंस प्लान में आमतौर पर 30-दिनों की प्रतीक्षा अवधि होती है, जिसके बाद इलाज पर होने वाला खर्च कवर किया जाता है. यह ध्यान रखने लायक बात है कि दुर्घटना के कारण होने वाले एमरज़ेंसी हॉस्पिटलाइज़ेशन के मामलों पर प्रतीक्षा अवधि लागू नहीं होती है.
  1. पॉलिसी की अवधि के दौरान कितने क्लेम किए जा सकते हैं?
हेल्थ इंश्योरेंस प्लान में किए जा सकने वाले क्लेम की संख्या की कोई सीमा नहीं है. ध्यान देने लायक बात यह है कि इंश्योरेंस क्लेम, हेल्थ इंश्योरेंस प्लान के सम इंश्योर्ड की अधिकतम राशि तक ही किए जा सकते हैं. बीमा आग्रह की विषयवस्तु है. लाभों, शामिल न की गई चीज़ों, सीमाओं, नियमों और शर्तों के बारे में और जानकारी के लिए, कृपया खरीद पूरी करने से पहले सेल ब्रोशर/पॉलिसी शब्दावली को ध्यान से पढ़ें.   स्रोत: [1] https://www.niti.gov.in/sites/default/files/2021-10/HealthInsurance-forIndiasMissingMiddle_28-10-2021.pdf [2] https://health.economictimes.indiatimes.com/news/pharma/health-insurance-is-wealth-many-realized-after-2nd-wave/85790116 [3] https://www.irdai.gov.in/ADMINCMS/cms/whatsNew_Layout.aspx?page=PageNo4057&flag=1 [4] https://www.downtoearth.org.in/dte-infographics/india_s_health_crisis/index.html

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