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21 जुलाई, 2020

भारत में हेल्थ इंश्योरेंस धोखाधड़ी के प्रकार

भारत में हेल्थ इंश्योरेंस के प्रति धीरे-धीरे जागरूकता में वृद्धि के साथ ही, हेल्थ इंश्योरेंस प्लान खरीदने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है. वैसे तो यह एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन इसका एकमात्र नकारात्मक पहलू यह है कि हेल्थ इंश्योरेंस इंडस्ट्री में हेल्थ इंश्योरेंस से संबंधित धोखाधड़ी बढ़ी है.

हम समझते हैं कि कई बार धोखाधड़ी जानबूझकर नहीं की जाती, लेकिन उनकी वजह से पॉलिसीधारकों और इंश्योरेंस कंपनियों, दोनों पर प्रभाव पड़ता है. हमें उम्मीद है कि इस ब्लॉग को आगे पढ़ने के बाद आप समझ पाएंगे कि किन घटनाओं को मेडिकल इंश्योरेंस प्लान में धोखाधड़ी माना जाता है और आप कैसे ऐसी गलतियां करने से बचेंगे.

हेल्थ इंश्योरेंस धोखाधड़ी के प्रकार

  • क्लेम से संबंधित धोखाधड़ी: यह हेल्थ इंश्योरेंस में होने वाली सबसे सामान्य धोखाधड़ी है. ऐसा कोई भी अवैध क्लेम, जिसके कारण पॉलिसीधारक को अनुचित फाइनेंशियल लाभ प्राप्त होता है, धोखाधड़ी वाला इंश्योरेंस क्लेम माना जाता है. हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम की धोखाधड़ी मानी जाने वाली कुछ परिस्थितियां नीचे दी गई हैं:
    • जाली/डुप्लीकेट मेडिकल बिल जमा करना
    • हेल्थ केयर सेवाओं के लिए किए गए खर्चों को बढ़ा-चढ़ा कर बताना
    • दुर्घटना में लगी चोट का झूठा क्लेम
    • उस उपचार के लिए क्लेम फाइल करना, जिसे प्राप्त नहीं किया गया है
    • नकली मेडिकल डॉक्यूमेंट बनाना (जैसे नाम, तिथि आदि बदलना)
  • एप्लीकेशन से जुड़ी धोखाधड़ी: एक व्यक्ति को उस इंश्योरेंस कंपनी का प्रपोज़ल फॉर्म भरना होता है, जिससे वह हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदना चाहता है. इस प्रपोज़ल फॉर्म में मांगी गई जानकारी पॉलिसी के तहत कवर किया जाने वाले लोगों की निजी जानकारी होती है, जैसे- पहले से मौजूद किसी भी बीमारी या मेडिकल स्थिति का विवरण, अन्य हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी (अगर कोई हो) की जानकारी.
    अब यह संभावना है कि इस प्रपोजल फॉर्म को भरते समय आप पहले से मौजूद किसी बीमारी के विवरण को भूल सकते हैं या गलती से गलत जन्मतिथि दर्ज कर सकते हैं. हालांकि ये गलतियां शुरुआत में मामूली लग सकती हैं, लेकिन उन्हें एप्लीकेशन धोखाधड़ी माना जाएगा. एप्लीकेशन धोखाधड़ी के मामलों में पहले से मौजूद बीमारियों का खुलासा न करना या पॉलिसी के तहत कवर किए गए सदस्यों के बारे में गलत जानकारी देने जैसी कुछ स्थितियां शामिल होती हैं.
  • पात्रता से संबंधित धोखाधड़ी: कई बार, लोग हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम फाइल कर देते हैं, लेकिन उन्हें ये नहीं पता होता कि उक्त बीमारी पॉलिसी के तहत कवर की जाती है या नहीं. या फिर वे किसी ऐसे व्यक्ति (रिश्तेदार या आश्रित) के लिए क्लेम सबमिट कर देते हैं, जिसे पॉलिसी में कवर नहीं किया गया है. ऐसे सभी मामले पात्रता से संबंधित धोखाधड़ी के अंतर्गत आते हैं.

पॉलिसीधारकों द्वारा की गई ये धोखाधड़ी गैर-इरादतन हो सकती हैं, लेकिन वे निश्चित रूप से बहुत सी अप्रिय परिस्थितियों का कारण बन सकती हैं, जिनमें क्लेम को अस्वीकृत करना या भविष्य में कवरेज प्रदान करने से इनकार करना शामिल है.

हेल्थ इंश्योरेंस में धोखाधड़ी करने के परिणाम

हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां जानबूझकर या अनजाने में धोखाधड़ी करने की कोशिश करने वाले लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करती हैं. भारत में, हेल्थ इंश्योरेंस से संबंधित धोखाधड़ी के परिणाम इस प्रकार हो सकते हैं:

  • धोखाधड़ी बहुत गंभीर होने पर आपकी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी कैंसल हो सकती है.
  • अगर आपको धोखाधड़ी करने का दोषी पाया जाता है, तो आपका क्लेम अस्वीकार हो सकता है.
  • आपको मेडिकल उपचार के सभी खर्चों का भुगतान स्वयं करना पड़ सकता है.
  • आप नेटवर्क हॉस्पिटल्स में गुणवत्तापूर्ण हेल्थ केयर सेवाएं प्राप्त करने का अवसर खो सकते हैं.
  • आपको अपनी मौजूदा पॉलिसी को रिन्यू करते समय भी समस्या हो सकती है.

कई लोगों को लगता है कि इंश्योरेंस कंपनियां क्लेम की पूरी राशि का भुगतान कभी नहीं करेंगी और इसलिए, वे क्लेम की राशि बढ़ाकर बताते हैं, जो अक्सर धोखाधड़ी का कारण बनती है. इसके अलावा, ऐसे कई लोग हैं, जो अपनी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की विशेषताओं और कवरेज के बारे में नहीं जानते हैं और इस प्रकार या तो धोखाधड़ी करते हैं या प्राप्त किए गए उपचार के लिए खुद की जेब से भारी-भरकम राशि का भुगतान करते हैं.

यह बहुत आवश्यक है कि आप अपने पॉलिसी डॉक्यूमेंट को ध्यान से पढ़ें और पॉलिसी अवधि शुरू होने से पहले इंश्योरेंस क्लेम के बारे में सारी जानकारी पाएं. वास्तव में, भारत में, हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी 15 दिनों की फ्री लुक पीरियड के साथ भी आती है. आप इन 15 दिनों में हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की उपयोगिता और आवश्यकता की जांच कर सकते हैं और इसे जारी रखने या बंद करने का विकल्प चुन सकते हैं.

आज की अनिश्चित दुनिया में, बीमार पड़ने की संभावनाएं बहुत अधिक होती हैं, इसलिए ऐसे मुश्किल समय में फाइनेंशियल सुरक्षा का होना बहुत ज़रूरी है. बढ़ते मेडिकल खर्चों के कारण भारत में हेल्थ इंश्योरेंस लेने वाले लोगों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ी है, हालांकि, हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के सफल और स्थायी उपयोग का तरीका अभी भी आसान नहीं है.

हम आशा करते हैं कि इस आर्टिकल से आपको अलग-अलग प्रकार की हेल्थ इंश्योरेंस धोखाधड़ी को समझने में मदद मिली होगी और आप अनजाने में कोई धोखाधड़ी करके किसी भी मुश्किल स्थिति का सामना नहीं करेंगे.

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