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24 जनवरी, 2022

हेल्थ इंश्योरेंस प्लान में प्रतीक्षा अवधि का महत्व

हेल्थ इंश्योरेंस प्लान खरीदते समय आपको 'प्रतीक्षा अवधि' नामक शब्द सुनने या पढ़ने को मिलेगा. अगर आप पहली बार हेल्थ इंश्योरेंस खरीद रहे हैं, तो शायद आपको पता नहीं होगा कि हेल्थ इंश्योरेंस में प्रतीक्षा अवधि का क्या मतलब होता है. यह अवधि कितनी लंबी होती है और इसमें क्या शामिल है. आपके मन में ये कुछ सवाल आ सकते हैं. हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में प्रतीक्षा अवधि के बारे में सब कुछ जानने के लिए आगे पढ़ें.

हेल्थ इंश्योरेंस प्लान में प्रतीक्षा अवधि को समझें

आसान शब्दों में, प्रतीक्षा अवधि वह समय है, जितने समय आपको प्रतीक्षा करनी होती है. हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के मामले में इसका मतलब है कि आपको पॉलिसी शुरू होने के बाद लाभों के उपयोग के लिए जितने समय रुकना पड़ता है, वही समय प्रतीक्षा अवधि है. आइए, मौजूद विभिन्न प्रकार की प्रतीक्षा अवधियों के बारे में जानें, जिसका पालन करते हैं, जब लेते हैं हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी.

शुरुआती प्रतीक्षा अवधि

प्रतीक्षा अवधि को कभी-कभी कूलिंग पीरियड भी कहते हैं. यह एक निश्चित समय होता है और इस समय के बाद ही मेडिकल इंश्योरेंस ऐक्टिव होता है और उसका लाभ लिया जा सकता है. अधिकतर इंश्योरेंस कंपनियों की शुरुआती प्रतीक्षा अवधि 30 दिनों की होती है. हालांकि, अलग-अलग कंपनियों की प्रतीक्षा अवधि अलग-अलग हो सकती है.

बीमारी विशेष की प्रतीक्षा अवधि

किसी बीमारी विशेष की प्रतीक्षा अवधि, शुरुआती प्रतीक्षा अवधि से अलग होती है. हर्निया, ट्यूमर, ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों के लिए अधिकतर लंबे समय तक देखभाल की ज़रूरत पड़ती है, पॉलिसी खरीदने पर इन खर्चों का भुगतान इंश्योरेंस कंपनी द्वारा किया जाता है. इसलिए, इंश्योरेंस कंपनियां विभिन्न बीमारियों के लिए एक विशेष प्रतीक्षा अवधि शामिल करती हैं. बीमारी विशेष की प्रतीक्षा अवधि एक से दो वर्ष होती है. हमारी सलाह है कि आप उन विशेष बीमारियों से जुड़े नियमों और प्रतीक्षा अवधि को समझने के लिए इंश्योरेंस कंपनी से पूछें.

पहले से मौजूद बीमारियों के लिए प्रतीक्षा अवधि

हेल्थ इंश्योरेंस प्लान खरीदते समय इंश्योरेंस कंपनियां पूछती हैं कि क्या आपको हैं पहले से मौजूद बीमारियां. कभी-कभी इंश्योरेंस कंपनी आपसे मेडिकल चेकअप कराने के लिए कह सकती है. पहले से मौजूद बीमारी का मतलब है कोई ऐसी स्वास्थ्य संबंधी समस्या, चोट, अस्वस्थता या बीमारी, जिसे हेल्थ प्लान खरीदने से पहले के 48 महीनों में डाइग्नोसिस किया गया हो. पहले से मौजूद बीमारियों के उदाहरण में थायरॉइड, डायबिटीज़ और हाइपरटेंशन आदि शामिल हैं. इसलिए मेडिक्लेम पॉलिसी खरीदते समय, अगर आपको पहले से कोई बीमारी है, तो आपको एक तय प्रतीक्षा अवधि तक इंतजार करना होगा. प्रतीक्षा अवधि समाप्त होने के बाद ही, कवर की गई बीमारी के कारण होने वाले किसी भी ट्रीटमेंट या हॉस्पिटलाइज़ेशन के लिए क्लेम किया जा सकता है. पीईडी यानि पहले से मौजूद बीमारियों की प्रतीक्षा अवधि आमतौर पर 01-04 वर्ष तक होती है. यह चुनी गई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के प्रकार के आधार पर अलग-अलग इंश्योरेंस कंपनियों में अलग-अलग हो सकती है.

एक्सीडेंटल हॉस्पिटलाइज़ेशन की प्रतीक्षा अवधि

दुर्घटनाओं में अचानक चोट लगती है और विभिन्न मेडिकल संबंधी समस्याएं होती हैं. दुर्घटनाओं के प्रकार को ध्यान में रखते हुए, अधिकतर इंश्योरेंस कंपनियां एक्सीडेंटल हॉस्पिटलाइज़ेशन पर कोई प्रतीक्षा अवधि लागू नहीं करती हैं. इसका मतलब है कि अगर हेल्थ प्लान अभी-अभी शुरू हुआ है, तो भी एक्सीडेंटल हॉस्पिटलाइज़ेशन क्लेम के लिए शुरुआती प्रतीक्षा अवधि लागू नहीं होगी.

मैटरनिटी की प्रतीक्षा अवधि

ऐसी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी हैं, जो मैटरनिटी लाभ देती हैं. यह प्लान का हिस्सा भी हो सकता है या ऐड-ऑन के रूप में भी उपलब्ध हो सकता है. मैटरनिटी की प्रतीक्षा अवधि के दौरान मैटरनिटी लाभ का क्लेम नहीं किया जा सकता है. प्रतीक्षा अवधि समाप्त होने से पहले किए गए मैटरनिटी लाभ के क्लेम अस्वीकार कर दिए जाते हैं. यह प्रतीक्षा अवधि अधिकतर 01 से 04 वर्षों तक की होती है. इसलिए अगर आप फैमिली हेल्थ इंश्योरेंस लेने जा रहे हैं, तो हेल्थ इंश्योरेंस प्लान की मैटरनिटी प्रतीक्षा अवधि पर ज़रूर विचार करें.

क्या प्रतीक्षा अवधि को कम करने का कोई तरीका है?

भारत में ऐसी हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां हैं, जो इंश्योर्ड व्यक्ति को प्रतीक्षा अवधि कम करने की सुविधा देती हैं. हालांकि, इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए इंश्योर्ड व्यक्ति को अतिरिक्त प्रीमियम चुकाना होता है. आमतौर पर, कंपनियों की ओर से कर्मचारियों को मिलने वाले हेल्थ प्लान में कोई प्रतीक्षा अवधि नहीं होती है. अगर हो भी तो वह साधारण हेल्थ इंश्योरेंस प्लान की तुलना में कम होती है. जिन कर्मचारियों के पास कंपनी छोड़ते समय ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस है, उन्हें आईआरडीएआई यह अनुमति देता है कि वे कंपनी छोड़ते समय उसे इंडिविज़ुअल हेल्थ प्लान में बदल सकते हैं. इस मामले में उन्हें बिना किसी प्रतीक्षा अवधि के पॉलिसी मिलेगी. ऐसा इसलिए है, क्योंकि वे कंपनी की ओर से मिली ग्रुप हेल्थ कवरेज में प्रतीक्षा अवधि समाप्त कर चुके हैं.

संक्षेप में

हेल्थ इंश्योरेंस की प्रतीक्षा अवधि चाहे जो हो, यह सुनिश्चित करें कि आप पूरी तरह सुरक्षित हों. यह हमेशा अच्छा होता है कि आप युवावस्था में ही मेडिकल इंश्योरेंस ले लें. इससे अधिकतर मामलों में बिना किसी क्लेम के प्रतीक्षा अवधि बीत जाती है. जब आप युवा होते हैं, तो आपका स्वास्थ्य बेहतर होता है. इसलिए जीवन में बाद के वर्षों में जब आपको क्लेम करने की ज़रूरत पड़ेगी, तब आप प्रतीक्षा अवधि के क्लॉज़ को पहले ही पार कर चुके होंगे. हेल्थ इंश्योरेंस प्लान पूरी तरह से थोड़ा-थोड़ा करके प्रीमियम जमा करने और जोखिम शेयर करने के विचार पर काम करता है. इंश्योर्ड व्यक्ति द्वारा समय पर हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम का भुगतान होने के बाद ही इंश्योरेंस कंपनी क्लेम का भुगतान करती है. सोच-समझकर निर्णय लें और प्रभावी कदम उठाएं.  

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